मैं उसके साथ वफ़ा नहीं करी पाई. क्यों? पता नहीं, शायद मैं गलत रही जो उसे छोड़कर दुसरे से जा मिली. जो लड़का मेरे लिए रोया, मेरे गलती पर गलती करने के बाद भी माफ़ किया मैंने उसे छोड़ दिया. किसी ऐसे के लिए जो मेरा था ही नहीं, न ही होगा. मैं ऐसा क्यों कर गई? क्या मुझे नौकरी मिलने का नशा चढ़ गया था या मुझे ख्याल ही नहीं था क्या कर रही हूँ. जवाब आज भी ढूंडती हूँ तो “आखो में बस पानी छलक जाता है”. और दिल बस इतना ही कह पाता है – “प्यार में दगा दिया मैंने.”
कभी कभी आपको कोई इतना अच्छा लगने लगता है की बस उसे पाने की तम्मना हो जाती है. मेरे साथ भी वैसे ही हुआ. जब मैंने उससे देखा था बस यही सोची थी यह लड़का मुझे मिल जाए. संयोग कहे या भाग्य ‘भगवन’ ने मेरी सुन ली थी. हमलोग धीरे-धीरे दोस्तो हो गए. फिर एक दिन मैंने उसे प्रपोज भी कर दिया. और उसने भी तुरंत ही “हाँ” कर दिया.
मैं अब सपने में जी रही थी ऐसा सपना जो सच्चा था. उसे पाने, उसे अपना बनाने का. वह अब मेरा था. सिर्फ मेरा. हमलोग खूब मिलने लगे. सभी से बचकर-बचाकर. नहीं मिलने पर बेचैनी सी चढ़ जाती और न देखने पर लगता जैसे कुछ खोया है. और “वो”. वो तो मुझसे जयादा मुझसे प्यार करता था. इतना खुबशुरत लड़का मुझे इतना प्यार करता था. मेरी न तो रंग थी, और न ही जयादा सुन्दरता.
मै कभी-कभी दुसरे से भी बात कर लेती. एक friend की तरफ. मगर उस से कभी नहीं बताई. हमेशा उस से छुपा कर रखी. कभी मिलने भी जाती तो अपना whats up और Facebook का data डिलीट कर देती.
क्या हुआ था मुझे? मै क्यों ऐसा कर रही थी. मुझे खुद पता नहीं था. मेरी बुद्धि कुंद हो गई थी. ऐसा नहीं था की उस से प्यार नहीं था, प्यार तो उस से ही था. फिर भी दुसरे के तरफ attract होती गई. और ऐसे होती गई की उसके खुशियों का ख्याल ही नहीं रहा. उसका trust मुझ पर अपने आप से जयादा था. और मैं उसका trust तोड़ती रही, हर बार.
अभी भी वह दिन याद है जब रात भर रोया था. जब उसको किसी ने मेरे बारे में बताया- बातें करने और मिलने की. एक बार सोची की बता दू की मै धोखा दे रही हूँ. किसी और से भी बात कारती हूँ. मगर मैं एक बार फिर कमजोर हो गई. दुसरे दिन मिले तो मैंने साफ मना कर दिया. “मैं किसी से बात करती ही नहीं.”
उसकी लाल-लाल आखें देखकर भी पसीज नहीं पाई.
जो एक ही बात बोल रही थी. “ये तुम्हारे चलते हुआ है. मैं सोई नहीं रात भर. बस बरसती रही. सावन की तरह.”
जो एक ही बात बोल रही थी. “ये तुम्हारे चलते हुआ है. मैं सोई नहीं रात भर. बस बरसती रही. सावन की तरह.”
गलत बाते कभी छिप नहीं पाती, मेरा बात उनको फिर मालूम हो गया.
“क्यों कर रही हो ऐसा? क्या चाहिए तुम्हे जो मैं नहीं दे रहा हूँ?” उसने अगले दिन मिलते ही पूछा.
“अब क्या कर दी?” मैं भी अनजान बनते हुई पूछी. गलती करने के बाद भी मैं उसे छुपाती रही.
“क्या तुमने कुछ नहीं किया? मै नहीं जनता हूँ जो कर रही हो” फिर उसने सारा चीज सामने रख दिया. और बोला – “अगर तुम यही करना चाहती हो तो करो, मन भर करो लो. जब मन भर जाये इस सब चीजो से. फिर मेरे पास आना, मैं तुमको वैसे ही मिलूँगा जैसे था.” उसकी आँखे भर आई थी. लेकिन मैं निलर्ज वैसे ही खड़ी रही , जैसे कुछ किया ही नहीं हो.
“सॉरी, अब नहीं होगा ऐसा. ये लास्ट टाइम. लास्ट टाइम माफ़ कर दो. इस बार हम दोनों अपना सिम change कर लेंगे.”
“number बदलने से कुछ नहीं होगा नियत बदलो. number कितना भी बदल लो और नियत बदलो ही नहीं तो क्या फायदा और ‘नियत ही अच्छा हो जाये तो number बदलने की क्या जरुरत.” उसने कहा.
मै उसके हाँ में हाँ मिलाती गई. मुझे ये बाते अच्छी नहीं लगती. सारी बकवास है. मैंने अपना number तो बदल लिया मगर मेरी नयत नहीं बदल पाई. मैं वही रही जो थी. उसके नजर में बदल गई थी. धीरे-धीरे वैसे ही हो गई जैसे थी.
समय बीतता गया. इसी बिच मुझे job मिल गया. कितने खुश हुई थी. और ‘वो’ भी कितना खुश था. हमने पहले ही प्लान बनाया था – job मिलेगा तो क्या क्या करंगे. कहाँ-कहाँ जायेंगे और क्या क्या खरीदना है. सारी चीज हमने पहले से सोच रखा था. मेरी job भी इसी शर्त पर हुआ था की पेमेंट का 50% दोनों लेंगे.
मैं job ज्वाइन कर लिया था. मैं उसके छोड़ अपने लाइफ में आगे बढ़ते गई. मैं यहाँ फिर से बात करना शुरू कर दिया. अपने office के ही लड़के से. एक बार फिर से उसे पता चल गया. मैंने उस से सॉरी बोल कर लास्ट टाइम बोली. वह फिर से मान गया.
समझ से बहार था मेरे की मुझे वो हर बार माफ़ क्यों कर दे रहा है. मैं उसे ही गलत समझे लगी. अब तक मेरा व्यवहार बिलकुल बदल चूका था. दगा और फरेब मेरे अंदर कूट-कूट कर भर गया. मैंने उसको इग्नोर करना शुरू कर दिया. उस लड़के से भी बात कर रही थी जिसे मैं उसके नजर में छोड़ चुकी थी.
ये मेरी last गलती थी. हमारे सपने, ‘नहीं, उसके सपने’ टूट चुके थे. हमने जो सोच था job होने पर क्या-क्या करेंगे, क्या क्या खरीदेंगे. सब कुछ ख़त्म हो गया क्यों की इस बार वह छोड़ के जा चूका था मुझे. दूर, – “बहुत दूर”, जहाँ से कभी लौट कर नहीं आने का वादा करके.
एक ऐसे लड़के का दिल तोड़कर मैं कहा खुश रहने वाली थी. मैं फिर भी नहीं बदली उसके लिए. शयद चाहती ही नहीं थी बदलना. अपने आदत से मजबूर अभी मैं वही कर रही जो वह नहीं चाहता था.
आज इतने दिनों बाद भी मेरा मन उदास हो जाता है उसके लिए. सब कुछ हो कर भी खालीपन का एहसास है उसके बिना. जो मेरी खुशियों के लिए जीया. जिसके साथ हर सुख-दुःख काटी. अब अच्छे समय में उसे छोड़ दिया. और दुसरे का हाथ थाम लिया. अब तो बस उसकी यांदे है और दिल यही कहता है. – “प्यार में दगा दिया मैंने.